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Self discipline And 5 easy step to achieve it in Hindi | आत्म-अनुशासन


प्रकृति हमेशा नियम का निश्चित रूप से पालन करती है। जैसे दिन-रात और अलग-अलग मौसम होते है ठीक इसी प्रकार जब एक व्यक्ति अपने आस पास के जीवन में नियमों का सही रूप से पालन करता है, तो उसे हम अनुशासन कहते हैं। और जब यह नियम हमारे अपने हो, जिनसे हमारे विचार-व्यवहार प्रभावीत होते हैं, तो उन्हें हम स्व अनुशासन कहते हैं। लोग अपने व्यवहार के कारण जाने जाते हैं और जो लोग अपने आप में अनुशासित होते हैं उनकी स्वतः एक अलग पहचान बन जाती है।

आत्म-अनुशासन का अर्थ है, किसी भी चीज़ या परिस्थिति को सही या गलत पहचानने की क्षमता जो नकारात्मक परिणामों को जन्म दे सकती है।

अनुसाशन के उच्च स्तर वाले लोग बहस में कम समय व्यतीत करते हैं और आवेगों या भावनाओं में बहने की बजाय वे वास्तविक आधार पर  निर्णय लेते है। परिणामस्वरूप, वे अपने जीवन से अधिक संतुष्ट महसूस करते हैं। ऐसी क्षमता हममे से हर किसीके पास नहीं होती क्योंकि जो काम आज तक हम करते आए हैं उस काम को करने में हमें शायद ज्यादा अनुसाशित रहने की जरूरत नहीं है।

हम अपने जीवन में ५ ऐसे तरीके का पालन करके अनुसाशन की उच्चतम सिमा पर पहुंच सकते है;
प्लान बनाये
अपनी दिनचर्या पर सख्त रहें
समय प्रबंधन
चैलेंज स्वीकार करे
अपने विकास पर ध्यान दें

प्लान बनाये
अनुशासित जीवन जीने की दिशा में पहला कदम लक्ष्य निर्धारित करना है। लक्ष्य आपको एक स्पष्ट विचार देते हैं कि क्या हासिल करना है। आपको अपने लक्ष्यों के लिए हमेशा एक समयसीमा निर्धारित करनी चाहिए। यह एक प्रेरक शक्ति के रूप में कार्य करता है और आपको कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित करता है। जैसे जैसे आप अपनी काम करने के तरीको में सुधार लाएंगे वैसे वैसे ये आपकी अच्छी आदतें बनती जाएगी। और ये आदते आपको अनुसाशन से पूर्ण जीवन जीने की ओर ले जाएगी।

अधिकांश लोग अपने जीवन में कभी भी अनुशासित नहीं रहते हैं क्योंकि वे आलसी होते हैं। हालाँकि, आलस्य आदत के रूप में भी है।

सफल लोग काम करने के लिए खुद को अनुशासित करते हैं और इसके अनुरूप रहते हैं। और यह एक आदत बन जाती है। यही उनके जीवन में सफलता को आकर्षित करता है।

अपनी दिनचर्या पर सख्त रहें
एक सामान्य दिनचर्या बनाएं जिसका आप पालन कर सके। उसी दिनचर्या का पालन करते हुए, यह आपकी प्रकृति बन जाती है जो हममे अनुसाशन को स्थापित करती है। अपनी खुद की दिनचर्या का तब तक पालन करते रहिये जब तक यह स्वचालित नहीं हो जाता।
दिनचर्या के पालन से न केवल आत्म-अनुशासन विकसित होगा, बल्कि यह आपके जीवन को एक तरह से व्यवस्थित करने में भी मदद करेगा। तुरंत आयोजन शुरू करें। दिनचर्या आपको आलस्य को कम करने, प्राथमिकताओं को स्थापित करने और लक्ष्यों पर नज़र रखने में मदद कर सकते हैं। यह इच्छाशक्ति और प्रेरणा पर आपकी निर्भरता को कम करता है।

समय प्रबंधन
समय कभी किसी की प्रतीक्षा नहीं करता हैं। यह बिल्कुल पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व की तरह ही सत्य है। समय बिना किसी रुकावट के निरंतर चलता रहता है।
यदि कोई व्यक्ति समय की अहमियत को नहीं समझता, तो समय भी उस व्यक्ति की अहमियत को नहीं समझता है। यदि हम अपने समय को नष्ट करेंगे, समय भी हमें बहुत बुरी तरह से नष्ट करेगा।
समय प्रबंधन काम पर अनुसाशन रखने के महत्वपूर्ण पहलु में से एक है। अन्यथा, आप अपने दैनिक कर्तव्यों में फंस जाएंगे। इसलिए, अपने कार्य करने के समय को महत्व दे। 
समय एक विशेष संसाधन है। हर किसी के पास हर दिन एक समान समय होता है, जिसे आप बाद में उपयोग के लिए स्टोर नहीं कर सकते हैं। आप केवल अपने समय के उपयोग को कम मूल्य के क्षेत्रों से उच्च मूल्य के क्षेत्रों में पुनः प्राप्त कर सकते हैं। यही अनुसाशन और सफलता की कुंजी है।

चैलेंज स्वीकार करे
चुनौती का समय अक्सर हमें उन चीजों की अनुभूति करता है जो वास्तव में मायने रखती हैं जो की पहले से हमारे पास हैं। यह हमें स्वयं का परिचय करवाती है, की हम क्या क्या कर सकते है और किस हद तक जा सकते है, पर हमारे श्रेष्ठत्व तक पहुंचने के लिए चुनौती का सामना करना पड़ेगा।
इससे हर अगले कदम पर हम अपने विचार, व्यवहार और आसपास की स्थिति को कैसे नियंत्रित करना हे ये सीखते जायेंगे और यही हमें अनुसाशन की ओर ले जायेगा।

अपने विकास पर ध्यान दें
हम सभी अपने जीवन में जहा है वह से आगे बढ़ाना चाहते है, पर सभी में खामियां और कमजोरियां है जिससे हमें लगता है कि हमारे पास कोई रास्ता नहीं है या हमारे रास्ते में बाधाओं को दूर करने की ताकत नहीं है यह सोच हमारे जीवन के हर पहलू को प्रभावित कर सकती हैं। लेकिन, अच्छी बात यह है कि हमारी सोच पर हम नियंत्रण कर सकते है और हम उन कई खामियों और बाधाओं को बदल सकते हैं जिन्होंने हमें पीछे खींच रखा है। उन बाधाओं और खामियों से निपट खुद पर नियंत्रण हासिल करना ही अनुसाशन है। इसीलिए परिस्थिति चाहे जो भी हो हमेशा खुद के विकास पे ध्यान दे।

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संक्षेप में, आप जिस पर ध्यान केंद्रित करते हैं, उसे आप आकर्षित करते हैं। यदि आप दुनिया में नकारात्मक ऊर्जा डालते हैं, तो आप नकारात्मक ऊर्जा को ही आकर्षित करेंगे।
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